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Thursday, 15 February 2018

अदृश्य शक्तियों की धारणा



- अदृश्य शक्तियों की धारणा -

                    
        मानव जीवन में शक्ति यानि ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्थान है | यह ऊर्जा भिन्न भिन्न स्थानों पर अलग नामो से पुकारी जाती है |  ये स्थान चाहे मानव शरीर में हो या इस दुनिया में कही पर हो, प्रत्येक स्थान पर उसका नाम है |  भारतीय संस्कृति में शक्ति को केंद्र मानकर ही अतिसूक्ष्म और विशाल खोज हुई |  यह खोज या अनुसन्धान वेद, पुराण, उपनिषद आदि में वर्णित है, इनको हम रिसर्च पेपर या डाक्यूमेंट्स कह सकते हैं ा  विश्व के अनेक विद्वानों ने इनका अध्ययन किया और कई तरह की व्याख्याऐं की है |  किन्तु हम सरल रूप में यह कह सकते है की शक्ति या ऊर्जा को जानना ही  स्वयं को जानना है |  वर्तमान युग की व्यापारिक व्यवस्था में मानव केवल प्रतियोगी बनकर धन के अर्जन और शरीर के सुख भोग को लक्ष्य बनाकर अन्धो की भांति जीवन की दौड़ में शामिल है |  वह स्वयं को जानने के लिए समय नहीं दे पा रहा है |  इसको प्रकारांतर से यह कह सकते है कि वह अस्थिर शक्ति या चलायमान शक्ति के भंवर में फस गया है |  उसको स्थिर शक्ति को जानने के लिए  प्रयास करना होगा |  या यूँ कहिये की उसको शक्तियों के स्थिर और चलायमान स्वरुप को जानना होगा |  शक्ति या ऊर्जा मूलतः एक ही है किन्तु स्थान विशेष पर इसका नाम और कार्य विशिष्ट हो जाता है इसलिए प्रत्येक स्वरुप को उसी रूप में जानना आवश्यक है |  इसलिए विशिष्ट स्थान पर शक्ति की धारणा करना उसके स्वरुप को जानने के लिए आवश्यक है |  भारतीय संस्कृति में धारणा को एक महत्वपूर्ण तत्त्व माना गया है |  इसका अभ्यास किये बिना मानव जीवन की ऊर्जा को जानना कठिन ही नहीं असंभव है |  धारणा यानि किसी शक्ति की किसी स्थान विशेष में उपस्थिति का विश्वास करना, ऐसा विश्वास जिसमे उस शक्ति का गुणधर्म और अदृश्य स्वरुप आपकी कल्पना में जाग्रत रूप में परिलक्षित हो |  सभी धर्मो में, सभी पंथो में, सभी पूजा पद्धतियों में धारणा का तत्व सनातन रूप से विद्यमान है |  यह शक्ति या ऊर्जा को जानने का बीज है |  इसके अभाव में सफलता पाना कठिन है |  इसलिए हमको  अदृश्य शक्तियों की धारणा  का अभ्यास करना चाहिए |  एक एक शक्ति की धारणा और उसके व्यापकता के बारे में अगले लेखो में अवगत  करवाएंगे |